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Rio में भारत का सपना चकनाचूर, मंगोलियाई पहलवान से हारे योगेश्वर

Reported by nationalvoice , Edited by sidharth-chaurasiya , Last Updated: Aug 21 2016 5:43PM
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नई दिल्ली : रियो ओलंपिक के आखिरी दिन भारत की ओर से मैदान में उतरे रेसलर योगेश्वर दत्त 0-3 से हारकर ओलंपिक से बाहर हो गए हैं। इसी के साथ भारत की झोली में एक और मेडल आते-आते रह गया। योगेश्वर का मुकाबला 65 किग्रा भारवर्ग के क्वालिफाइंग राउंड में मंगोलिया के पहलवान मंदाखनारन गैंजोरिग से था, जिसमें उन्हें गैंजोरिंग ने 0-3 से हरा दिया।
 
योगेश्वर के मुकाबले पहले पीरियड में गैंजोरिंग ने काफी अटैक किए। दत्त को अंपायर ने 30 सेकेंड के भीतर अटैक करने की चेतावनी दी, लेकिन वह सफल नहीं हुए और विरोधी को 1 अंक मिल गया। इस प्रकार दत्त पहले पीरियड की समाप्ति पर मंगोलियाई पहलवान से 0-1 से पीछे हो गए।
 
दूसरे पीरियड में योगेश्वर से वापसी की उम्मीद थी, लेकिन वह कोई कमाल नहीं कर सके, बल्कि मंगोलियाई पहलवान ने एक बार फिर अटैक किया और 2 अंक हासिल करके बढ़त को 3-0 कर लिया। अंत में भारत की पदक की उम्मीद योगेश्वर दत्त हार गए और वापसी नहीं कर सके।
 
बता दें कि अब तक भारत की झोली में सिर्फ दो ही पदक आए हैं। पहला मेडल पहलवान साक्षी मलिक ने दिलाया, जो दूसरा मेडल सिल्वर के रूप में पीवी सिंधु ने जीता। ओलंपिक में अब तक के अपने सबसे बड़े दल के साथ उतरे भारत को कई खिलाड़ियों से मेडल की उम्मीद थी, लेकिन अभिनव बिंद्रा, साइना नेहवाल, सानिया मिर्जा और लिएंडर पेस जैसे दिग्गज कुछ नहीं कर पाए।
 
जिस वजह से ओलंपिक के समापन के दिन देशवासियों को पहलवान योगेश्वर दत्त से काफी उम्मीदें थी। देश के तमाम हिस्सों में उनके लिए यज्ञ-हवन किए गए। हालांकि, उनसे ये उम्मीद करना कोई गलत भी नहीं था, क्योंकि पूरी दुनिया लंदन ओलंपिक के दंगल में इस सुल्तान का जलवा देख चुकी है।
 
लंदन में ऐसे लहराया था तिरंगा
दत्त भारत की ओर से कुश्ती में मेडल जीतने वाले तीसरे पहलवान हैं। सबसे पहले 1952 के ओलिंपिक खेलों में भारत के खशब जाधव ने ब्रॉन्ज जीता था। फिर 2008 के बीजिंग ओलिंपिक में पहलवान सुशील कुमार ब्रॉन्ज जीतने में कामयाब रहे थे।
 
लंदन ओलिंपिक में एक समय ऐसा लग रहा था कि योगश्वर दत्त मेडल नहीं जीत पाएंगे और 60 किग्रा भार वर्ग में अंतिम 8 के मुकाबले में रूस के पहलवान से हार गए थे, लेकिन वह लकी रहे कि उन्हें कुश्ती के एक नियम का फायदा मिला। उन्हें हराने वाला रूसी पहलवान फाइनल में पहुंच गया और दत्त को रेपचेज राउंड में मौका मिल गया। इसमें उन्हें दो मैच खेलने पड़े। सबसे पहले उन्होंने प्यूर्तो रिको के पहलवान को हराया, फिर दूसरे मुकाबले में ईरान के पहलवान को हराकर ब्रॉन्ज पर कब्जा कर लिया।

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