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एक और मेडल की उम्मीद, योगेश्वर दत्त रविवार को दिखाएंगे दमखम

Reported by nationalvoice , Edited by sidharth-chaurasiya , Last Updated: Aug 20 2016 9:21PM
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नई दिल्ली : रियो ओलंपिक का कल आखिरी दिन है और भारत की झोली में अभी तक सिर्फ 2 ही मेडल आए हैं, ऐसे में भारत की नजरें गोल्ड पर टिकी हुई है। भारत की उम्मीदें इसलिए भी है क्योंकि पदक के सबसे बड़े दावेदारों में से एक पहलवान योगेश्वर दत्त का मुकाबला समापन समारोह के दिन ही है। लिहाजा, सभी की निगाहें लंदन ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त पर होगी।
 
लंदन में ऐसे लहराया था तिरंगा
दत्त भारत की ओर से कुश्ती में मेडल जीतने वाले तीसरे पहलवान हैं। सबसे पहले 1952 के ओलंपिक खेलों में भारत के खशब जाधव ने ब्रॉन्ज जीता था। फिर 2008 के बीजिंग ओलंपिक में पहलवान सुशील कुमार ब्रॉन्ज जीतने में कामयाब रहे थे।
 
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लंदन ओलंपिक में एक समय ऐसा लग रहा था कि योगश्वर दत्त मेडल नहीं जीत पाएंगे और 60 किग्रा भार वर्ग में अंतिम 8 के मुकाबले में रूस के पहलवान से हार गए थे, लेकिन वह लकी रहे कि उन्हें कुश्ती के एक नियम का फायदा मिला। उन्हें हराने वाला रूसी पहलवान फाइनल में पहुंच गया और दत्त को रेपचेज राउंड में मौका मिल गया। इसमें उन्हें दो मैच खेलने पड़े। सबसे पहले उन्होंने प्यूर्तो रिको के पहलवान को हराया, फिर दूसरे मुकाबले में ईरान के पहलवान को हराकर ब्रॉन्ज पर कब्जा कर लिया।
 
पहलवान ने पिछले साल भी एशियन ओलंपिक क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीतकर रियो के लिए कोटा पक्का किया। हर विवाद से दूर योगेश्वर का भी अब बस एक ही सपना है और वो है ओलंपिक का गोल्ड। देश के इस पहलवान की इस सपने के साथ पूरा देश खड़ा है और दुआओं का दौर जारी है। योगेश्वर रविवार शाम को मैट पर उतरेंगे और रात तक फैसला हो जाएगा कि 33 साल का हरियाणा का ये शेर क्या भारतीय कुश्ती इतिहास का सबसे बड़ा सुल्तान बनता है या नहीं।
 

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