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अब पीवी सिंधू खाएंगी आइसक्रीम, यूज करेंगी मोबाइल !

Reported by nationalvoice , Edited by sidharth-chaurasiya , Last Updated: Aug 20 2016 3:40PM
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नई दिल्ली : रियो ओलंपिक में देश के लिए सिल्वर मेडल जीतने वाली पीवी सिंधू ने इस मुकाम पर पहुंचने के लिए न जाने अपने कितने अरमानों को दांव पर लगा दिया लेकिन आज अब वक्त बदल गया है। अब सिंधू को अपने गुरु पुलेला गोपीचंद से कोई समझौता नहीं करना पड़ेगा। अब वो मजे से आईसक्रीम खा सकेंगी और मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर सकेंगी। बता दें कि पिछले तीन महीने से पीवी सिंधू को उनके कोच की तरफ से मोबाइल फोन और आईसक्रीम से दूर रखा गया है।
 
नरम पड़ गए गोपी
सिंधू के कोच गोपीचंद के बारे में ऐसा कहा जाता है कि जब बात अनुशासन की आ जाती है तो वो किसी भी हाल में किसी से कोई समझौता नहीं करते हैं। शायद यही वजह है कि अब तक उनके जितने भी शिष्य रहे हैं गोपीचंद के सिद्धांत उन शिष्यों के लिए नहीं बदले। लेकिन जिस दिन उनकी शिष्या सिंधू ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनी उस दिन एक कड़क शिक्षक भी नरम बन गया और उन्होंने बड़े भाई की तरह भूमिका निभाई। अब मिशन पूरा होने के बाद सिंधू भी एक आम 21 वर्षीय लड़की की तरह जिंदगी जी सकती हैं तथा अपने साथियों को व्हाट्सएप पर संदेश भेजने के अलावा अपनी पसंदीदा आईसक्रीम भी खा सकती है।
 
 
खाने दूंगा आईसक्रीम भी
सिंधू के रजत पदक जीतने के बाद गोपी ने कहा, 'सिंधू के पास पिछले तीन महीने के दौरान उसका फोन नहीं था। पहला काम मैं यह करूंगा कि उसे उसका फोन लौटाउंगा। दूसरी चीज यहां पहुंचने के बाद पिछले 12-13 दिन से मैंने उसे मीठी दही नहीं खाने दी थी जो उसे बहुत पसंद है। मैंने उसे आईसक्रीम खाने से भी रोक दिया था। अब वो जो चाहे खा सकती है।'
 
इस पल को जीने की हकदार है सिंधू
 
गोपी ने ओलंपिक से सिंधू के अनुशासन और कड़ी मेहनत की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, 'पिछला हफ्ता उसके लिए शानदार रहा। पिछले दो महीनों में उसने जिस तरह से कड़ी मेहनत की वह बेजोड़ था। जिस तरह से बिना किसी शिकायत के उसने बलिदान किए वह शानदार था। वह अब इस पल का आनंद लेने की हकदार है और अब मैं वास्तव में चाहता हूं कि वह ऐसा करे। मैं वास्तव में बहुत बहुत खुश हूं।'
 
 
इस टूर्नामेंट से सिंधू ने सीखा बहुत कुछ
सिंधू अभी 21 साल की हैं और गोपी को उम्मीद है उनकी पसंदीदा शिष्या अभी काफी कुछ हासिल करेगी। उन्होंने कहा, 'सिंधू अभी युवा है। मेरा मानना है कि इस टूर्नामेंट से उसे काफी कुछ सीखने को मिला है। उसके पास आगे बढ़ने की बहुत क्षमता है। आपको अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करना चाहिए। उसने हमें गौरवान्वित किया है। मैं उसके लिए वाकई खुश हूं।' गोपी ने सिंधू को सलाह दी कि वह स्वर्ण पदक से चूकने के कारण निराश होने के बजाय रजत पद जीतने की खुशी मनाए।
 
अलग तरह की खिलाड़ी दिखी सिंधू
गोपी ने कहा कि अगर स्टेडियम में राष्ट्रगान बजता तो उन्हें अधिक खुशी होती। उन्होंने कहा, 'मैं भी चाहता था कि हमारा ध्वज थोड़ा और ऊपर फहराया जाता लेकिन यह कहते हुए भी मैं सिंधू की तारीफ करता हूं कि उसने यहां तक पहुंचने के लिए बेहद कड़ी मेहनत की।' टूर्नामेंट की बात करें तो विश्व में दसवें नंबर की सिंधू पूरी तरह से एक अलग तरह की खिलाड़ी दिखी। यहां तक भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी और लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता साइना नेहवाल ग्रुप चरण से ही बाहर हो गई थी।
 

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