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हमें नाज है सिंधू पर, ओलंपिक में देश को दिलाया सिल्वर मेडल

Reported by nationalvoice , Edited by sidharth-chaurasiya , Last Updated: Aug 19 2016 9:13PM
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रियो डी जेनेरियाः बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू ने देश को सिल्वर मेडल दिलाकर अपना और देश का नाम रौशन किया है। रियो ओलंपिक फाइनल में पीवी सिंधू और स्पेन की नंबर वन खिलाड़ी कैरोलिना मारिन के बीच कड़ा और रोमांचक मुकाबला हुआ। आखिरकार मरीन ने तीन सेटों के खेल में 2-1 से जीत दर्ज की। उनकी इस कामयाबी पर देश के पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर बधाई दी। 

 

पहला गेम सिंधू ने 21-19 से जीता, दूसरे गेम में कैरोलीना ने 21-12 से बाजी मारी, लेकिन तीसरे और आखिरी गेम में सिंधू को एक कड़े और रोमांचित मुकाबले में 21-15 से हार का समना करना पड़ा। 

इसी के साथ सिंधू देश की सर्वश्रेष्ठ बैडमिंटन खिलाड़ी बन गई हैं। बता दें कि सिंधू कैरोलिना को पहले भी शिकस्त दे चुकी हैं। उन्होंने पिछले साल डेनमार्क ओपन सुपर सीरीज के सेमीफाइनल में उन्होंने मारिन के खिलाफ जीत दर्ज की थी।

पीवी सिंधु से जुड़ी कुछ खास बातें

पुसरला वेंकटा सिंधु (पीवी सिंधु) का जन्म 5 जुलाई 1995 को हुआ था। पीवी सिंधु के माता-पिता दोनों ही पेशेवर बॉलीवाल खिलाड़ी रह चुके हैं। सिंधु के पिता पीवी रमन्ना को बॉलीवाल के लिए अर्जुन पुरस्कार मिल चुका है।

सिंधु ने 7-8 साल की उम्र में ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था। बेटी की रुचि को देखते हुए उनके पिता ट्रेनिंग के लिए रोज घर से 30 किलोमीटर दूर गाचीबौली ले जाते थे। पीवी सिंधु हैदराबाद में गोपीचंद बैडमिंटन अकैडमी में ट्रेनिंग लेती हैं और उन्हें 'ओलिंपिक गोल्ड क्वेस्ट' नाम की एक नॉन-प्रॉफिट संस्था सपॉर्ट करती है।

सिंधु को यहां तक पहुंचाने में पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी पुलेला गोपीचंद का अहम योगदान है। सिंधु जब 9 साल की थीं, तब से गोपीचंद उन्हें ट्रेनिंग दे रहे हैं। हालांकि, सिंधु को शुरुआती ट्रेनिंग महबूब अली ने दी थी।

30 मार्च 2015 को सिंधु को भारत के चौथे उच्चतम नागरिक सम्मान, पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 2014 में सिंधु ने एफआईसीसीआई ब्रेकथ्रू स्पॉर्ट्स पर्सन ऑफ द इयर 2014 और एनडीटीवी इंडियन ऑफ द इयर 2014 का अवार्ड जीता।

पिछले तीन साल से सिंधु सुबह 4:15 बजे ही उठ जाती हैं और बैडमिंटन की प्रैक्टिस करती हैं।

एक रेलवे कर्मचारी और पूर्व वॉलीबॉल खिलाड़ी सिंधु के पिता ने 8 महीने की छुट्टी ली थी, ताकि वह अपनी बेटी का ट्रेनिंग के दौरान समर्थन कर सके।

2010 में वह महिलाओं का टूर्नमेंट उबेर कप में भारतीय टीम का हिस्सा रही थीं। 2014 में ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में सिंधु सेमीफाइनल तक पहुंचने में कामयाब रही थीं। जबकि 2015 में वे डेनमार्क ओपन के फाइनल तक पहुंचीं। इसी साल उन्होंने मलेशिया मास्टर्स ग्रां प्री में एकल खिताब भी जीता है।

10 अगस्त 2013 को सिंधु भारत की पहली एकल खिलाड़ी बनीं, जिन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप में कोई पदक (कांस्य) जीता।

सिंधु के बारे में उनके आदर्श गोपीचंद कहते हैं कि सिंधु कभी हार नहीं मानतीं और वह जो ठान लेती हैं, उसे पूरा करने में जी जान लगा लेती हैं।


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